नई दिल्ली : बापू आसाराम जी आश्रम ट्रस्ट द्वारा विभिन्न समाचार चैनलों, उनके सीईओ और न्यूज़ एंकरों के खिलाफ दायर आपराधिक परिवाद पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। 'एकतरफा मीडिया ट्रायल', मानहानि और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इस संवेदनशील मामले में अदालत ने संज्ञान लेते हुए गवाहों को समन जारी कर तलब किया है। मामले में सम्मन पूर्व साक्ष्य (PSE) दर्ज करने के लिए अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 मुकर्रर की गई है। इस अहम मामले में शिकायतकर्ता ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मिश्रा न्यायालय में मजबूती से पैरवी कर रहे हैं।
TRP के लिए किया गया 'मीडिया ट्रायल'
दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 200 के तहत ट्रस्ट के ट्रस्टी राजीव कुमार अग्रवाल द्वारा यह परिवाद दायर किया गया है। अधिवक्ता धर्मेंद्र मिश्रा के माध्यम से दायर इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अगस्त 2013 में एफआईआर दर्ज होने के बाद से मीडिया ने टीआरपी (TRP) बटोरने के लिए एकतरफा 'मीडिया ट्रायल' चलाया। बिना किसी न्यायिक फैसले के संत श्री आसाराम जी बापू के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे उनकी और लाखों अनुयायियों की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा।
पॉक्सो एक्ट के उल्लंघन और आस्था पर प्रहार का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि अद्वैत दर्शन और संत मत का पालन करने वाले करोड़ों भक्तों की आस्था को मीडिया कवरेज द्वारा जानबूझकर निशाना बनाया गया। आश्रम की सदियों पुरानी धार्मिक प्रथाओं को गलत तरीके से पेश कर हिंदू धर्म की छवि खराब करने की कोशिश की गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि मीडिया ने यौन उत्पीड़न से जुड़े इस मामले में पुलिस जांच की गोपनीय रिपोर्ट और पीड़िता से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को अवैध रूप से प्रसारित किया, जो पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत सीधे तौर पर दंडनीय अपराध है।
भड़काऊ कवरेज से बिगड़ा था माहौल
परिवाद में इस बात का भी प्रमुखता से जिक्र है कि मीडिया के अतिरंजित और भड़काऊ प्रसारण से समाज में शत्रुता और वैमनस्य का माहौल बना। इसके परिणामस्वरूप कई जगहों पर आश्रमों में असामाजिक तत्वों ने तोड़फोड़ की। मीडिया द्वारा किए गए लगातार अपमान से व्यथित होकर कुछ अनुयायियों ने आत्महत्या करने जैसा घातक कदम भी उठाया।
इन धाराओं में हुई है शिकायत:
मीडिया घरानों पर आईपीसी की धारा 108, 120B (आपराधिक साजिश), 153A, 295A (धार्मिक भावनाएं आहत करना), 500 (मानहानि), 505, और 506 के साथ पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 23, आईटी एक्ट की धारा 66A और केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम की धारा 16 व 17 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
अदालत ने संबंधित एसएचओ (SHO) को निर्देश दिया है कि वे मामले की अगली तारीख पर गवाह संख्या 3 को नए सिरे से समन जारी करें। गवाह को अपने साथ वह विशेष रिकॉर्ड भी लाने को कहा गया है, जिसकी अदालत ने मांग की है।